ਸ੍ਰੀ ਆਦਿ ਗ੍ਰੰਥ

Sri Adi Granthਸ੍ਰੀ ਆਦਿ ਗ੍ਰੰਥश्री आदि ग्रंथ

Arranged as in the Granth: the opening banis, each Raag by Ang, then Bhagat Bani and the closing Saloks.ਗ੍ਰੰਥ ਦੀ ਤਰਤੀਬ ਅਨੁਸਾਰ: ਆਰੰਭਕ ਬਾਣੀਆਂ, ਫਿਰ ਅੰਗਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਹਰ ਰਾਗ, ਫਿਰ ਭਗਤ ਬਾਣੀ ਅਤੇ ਅਖੀਰਲੇ ਸਲੋਕ।ग्रंथ के क्रम में: आरंभिक बाणियाँ, फिर अंग के अनुसार हर राग, फिर भगत बाणी और अंतिम सलोक।

ਆਰੰਭਕ ਬਾਣੀਆਂ

Opening Banis

आरंभक बाणीआं

Ang 1–13ਅੰਗ ੧–੧੩अंग 1–13
ਸਿਰੀਰਾਗੁ

Sri Raag

सिरीरागु

Ang 14–93ਅੰਗ ੧੪–੯੩अंग 14–93
ਮਾਝ

Raag Majh

माझ

Ang 94–150ਅੰਗ ੯੪–੧੫੦अंग 94–150
ਗਉੜੀ

Raag Gauri

गउड़ी

Ang 151–346ਅੰਗ ੧੫੧–੩੪੬अंग 151–346
ਆਸਾ

Raag Asa

आसा

Ang 347–488ਅੰਗ ੩੪੭–੪੮੮अंग 347–488
ਗੂਜਰੀ

Raag Gujri

गूजरी

Ang 489–526ਅੰਗ ੪੮੯–੫੨੬अंग 489–526
ਬਿਹਾਗੜਾ

Raag Bihagra

बिहागड़ा

Ang 537–556ਅੰਗ ੫੩੭–੫੫੬अंग 537–556
ਵਡਹੰਸ

Raag Vadhans

वडहंस

Ang 557–594ਅੰਗ ੫੫੭–੫੯੪अंग 557–594
ਸੋਰਠਿ

Raag Sorath

सोरठि

Ang 595–659ਅੰਗ ੫੯੫–੬੫੯अंग 595–659
ਧਨਾਸਰੀ

Raag Dhanasri

धनासरी

Ang 660–695ਅੰਗ ੬੬੦–੬੯੫अंग 660–695
ਜੈਤਸਰੀ

Raag Jaitsri

जैतसरी

Ang 696–710ਅੰਗ ੬੯੬–੭੧੦अंग 696–710
ਸੂਹੀ

Raag Suhi

सूही

Ang 728–794ਅੰਗ ੭੨੮–੭੯੪अंग 728–794
ਬਿਲਾਵਲੁ

Raag Bilaval

बिलावलु

Ang 795–858ਅੰਗ ੭੯੫–੮੫੮अंग 795–858
ਰਾਮਕਲੀ

Raag Ramkali

रामकली

Ang 876–974ਅੰਗ ੮੭੬–੯੭੪अंग 876–974
ਮਾਰੂ

Raag Maru

मारू

Ang 989–1106ਅੰਗ ੯੮੯–੧੧੦੬अंग 989–1106
ਤੁਖਾਰੀ

Raag Tukhari

तुखारी

Ang 1107–1117ਅੰਗ ੧੧੦੭–੧੧੧੭अंग 1107–1117
ਬਸੰਤੁ

Raag Basant

बसंतु

Ang 1168–1196ਅੰਗ ੧੧੬੮–੧੧੯੬अंग 1168–1196
ਸਾਰਗ

Raag Sarang

सारग

Ang 1197–1253ਅੰਗ ੧੧੯੭–੧੨੫੩अंग 1197–1253
ਮਲਾਰ

Raag Malar

मलार

Ang 1254–1293ਅੰਗ ੧੨੫੪–੧੨੯੩अंग 1254–1293
ਕਾਨੜਾ

Raag Kanra

कानड़ा

Ang 1294–1318ਅੰਗ ੧੨੯੪–੧੩੧੮अंग 1294–1318
ਜੈਜਾਵੰਤੀ

Raag Jaijavanti

जैजावंती

Ang 1352–1353ਅੰਗ ੧੩੫੨–੧੩੫੩अंग 1352–1353
ਭਗਤ ਬਾਣੀ

Bhagat Bani

भगत बाणी

across Raagsਸਾਰੇ ਰਾਗਾਂ ਵਿੱਚसभी रागों में
ਸਲੋਕ

Saloks & Closing Banis

सलोक

Ang 1353–1430ਅੰਗ ੧੩੫੩–੧੪੩੦अंग 1353–1430
0:00
0:00